अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर कविता | International Tiger Day Poems Hindi

Poetry World Tiger Day Hindi:- विश्व में जिस तेजी से बाघों की संख्या कम होती जा रही है जिससे लगता है कि आने वाले समय में बाघों का इस धरती से नामो निशान मिट जाएगा बाघों के घटते हुए जातियों को देखते हुए बाघ संरक्षण हेतु विश्व बाघ दिवस 29 जुलाई को मनाया जाता है ताकि लोगों के बीच जानवरों की जीवन की समझ विकसित हो पाए जहां तक की डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने बताया है कि पूरे विश्व में वर्तमान में बाघों की संख्या 3000 हैं हालांकि जिनमें से ज्यादातर बाग भारत में ही पाए जाते हैं।

अंतराष्ट्रीय बाघ संरक्षण दिवस पर कविताएं - International Tiger Day Poems in Hindi


हासिल जिसको खिताब, विश्व दिवस उसका आज, 
विश्व की 70 फ़ीसदी, आबादी भारत में रहती।
एक समय ऐसा था, अस्तित्व पर संकट था, 
धीरे धीरे बढ़ता क्रम अब रहा न कोई भ्रम

भारत में इनकी कुल, संख्या 2967 हो गई, 
50 से ज्यादा संख्या, टाइगर रिजर्व हो गई,
वन पारिस्थितिकी तंत्र में,  सबसे अहम भूमिका रखते, 
उनके स्वस्थ, सुरक्षित रहते, जैव विविधता होती खुशहाल,
आओ मनाले मिलकर आज,  विश्व बाघ दिवस मन से आज ।

International tiger day 29 July poster images


बाघ पर कविता - World Tiger Day 29 July Hindi Poems


आज विश्व बाघ दिवस, बाघ दीखते नहीं। 
बाघों की जगह बस, घाघ नजर आते हैं। 
घाघ हर रूप में, शहर-शहर गाँव-गाँव। 
भोली भाली सूरतों में, हमें मिल जाते हैं। 
बाघों का ठिकाना तो, जू और जंगल हैं। 
घाघ इंसानों के बीच बस जाते हैं। 
बाघ और घाघों की, नीयत बुरी है मित्रो । 

दोनों ही इंसानों को, नोंच-नोंच खाते हैं। 
नस्ल इन बाघों की, लुप्त न हो जाये कहीं। 
बाघ इसीलिये "अटल", संरक्षण पाते हैं। 
घाघ इंसानियत को, नित्य-नित्य धोखा दें। 
फिर भी इंसानों में, मजे ये उड़ाते हैं। 
बाघों की नस्ल दुर्लभ, अनभिज्ञ अधिकतर हैं। 

घाघ सहज सुलभ होकर, हमें ठग जाते हैं। 
कभी हँस के बातें करें, कभी झूठे वादे करें । 
कभी-कभी घड़ियाली, 
आँसू भी बहाते बाघों से सुरक्षित हैं तो, 
घाघों से सतर्क रहें। 

बातों ही बातों में, चूना लगा जाते हैं। 
स्वार्थ पूर्ति तक तो ये, चौखट को छोड़ें नहीं। 
इसके बाद वर्षों तक, दूरियाँ बनाते हैं। 
- अटल राम चतुर्वेदी

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रूस में 2010 में आयोजित हुए टाइगर सम्मिट में हर वर्ष 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस मनाने का निर्णय लिया गया हालांकि इस सम्मेलन में तेरह राष्ट्रीय शामिल थे इस सम्मेलन में बाघों की संख्या दुगनी करने के लिए 2022 तक का दिन रखा गया था।

लेकिन जंगलों के कटने से और उनके शिकार होने के कारण जहां तक लग रहा है कि बाघों की संख्या दुगनी ना हो सकेग और तो और बाघों को जंगल का स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है और बात को शक्ति शान सत करता बुद्धि और धैर्य का प्रतीक भी माना जाता है।