जनसंख्या विस्पोट पर कविता | अन्तर्राष्ट्रीय जनसंख्या दिवस पर कविता

World Population Day Quotes:- विश्व भर में इंसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है मौजूदा समय में भारत में जनसंख्या विस्फोट हुआ है, जब किसी देश में मृत्यु दर और साथ ही बच्चों की मृत्यु दर में कमी आती है तब सम संख्याओं का विस्फोट होता है। जनसंख्या विस्फोट होने से हमारी आबादी बढ़ जाती है इसके कारण जरूर देते भी बढ़ जाती हैं यही कारण है कि वातावरण प्रदूषित होता है और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है।

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जनसंख्या विस्फोट पर कविता- World Population Day Theme Poems In Hindi

जनसंख्या का वृहद विस्फोट
कुछ भी तो न  रह सिमट
नहीं दिखाई देती ओट
खुद ही खुद पर करते चोट
जिस वृक्ष ने दी है ओट
बस उसी को रहे कचोट

जनसंख्या का वृहद विस्फोट
कर रहे हैं किस पर चोट?
चाहे न खाने को हों रोट
बस धर्म की लेकर ओट
वतन विकास पर  करते चोट

वतन विकास का रुका प्रावधान
आंखें मूंद बने अंजान
नहीं है बूझे दुष्परिणाम
हम ही भुगत रहे अंजाम
क्यों न दिखते दुष्परिणाम?

न रोजगार, न पल्ले नोट
मिले न चाहे ठंड में कोट
न कोट, न आश्रय ओट
नाही हो खाने को चाहे रोट
जनसंख्या का वीभत्स विस्फोट

गहन समस्याओं को आमन्त्रण
जनसंख्या पर नहीं नियन्त्रण
बिना विचारे दिया निमन्त्रण
भयावह परिणामों पर दिया न ध्यान
  प्रत्यक्ष परोक्ष भीषण परिणाम

वर्षों वर्ष रहे परतन्त्र
आज भी सोच का बिगडा़ तन्त्र
तर्क कुतर्क ही इनका यन्त्र
बिना प्रयास न कोई तन्त्र
शायद विवेक से लिया न मन्त्र

कैसा है ये लोकतंत्र?
जी रहे हैं लोकतंत्र
धर्म हितार्थ ज्यादा वोट
बस विमर्श दिया है छोड़
हद से ज्यादा रहे निचोड

किसकी खातिर  चाहिए वोट?
क्या करेंगे खोटे वोट?
नहीं जरूरत ऐसे वोट
आया वक्त करे हम चोट
जो खड़े हुए हैं बन अवरोध

बन प्रबुद्ध, करना है युद्ध
जो जनसंख्या नियंत्रण के हैं विरुद्ध
देश हितार्थ हम भी बुद्ध
बन प्रबुद्ध कर सकते युद्ध
विकास यात्रा के  बन आयुध
- ऊषा सूरी

जनसंख्या नियंत्रण और अतंर्राष्ट्रीय जनंसख्या दिवस पर कविता

ना बच्चे की किस्मत खोटी ना कर्मों में खोट है,
सोची समझी साजिश है ये जनसंख्या विस्फोट है,

पाँच भाई, चार बहनें बस दो माँ-बाप का कुनबा,
उत्पादन अभी जारी है बढ़ता है बेनाप का कुनबा,
असीमित जनसंख्या की सीधी बचपन पर चोट है,

जो उम्र है जीने की उस उम्र में बच्चा काम करे,
ये ऐसा अपराध है जो बचपन को बदनाम करे,
मानवता के सीने में उठती एक दर्द भरी कचोट है,

पन्नी बिनते निर्दोष बच्चे कूड़े के ढेर पर फिरते है,
शोषण उनका होता है सैकड़ो कुपोषण से मरते है,
कोई भले ही ना समझे पर ये तो मानवता की मौत है,

बचपन यदि बचाना है तो जनसंख्या नियंत्रण करना होगा,
इस जनसँख्या विष्फोट के भयावह परिणाम से डरना होगा, 
जनसंख्या नियंत्रण कानून लिए 'धीर' करता सपोर्ट है.

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अंतरराष्ट्रीय मानव आबादी दिवस 11 जुलाई को पूरे भारत में मनाया जाता है ताकि जनसंख्या नियंत्रण पर ध्यान दिया जा सके आपसे उम्मीद करूंगा कि आप इस आर्टिकल को अपने मित्रों के साथ भी शेयर करेंगे जिससे हमारे समाज में खुशियां लिया सकती है धन्यवाद