धूम्रपान पर कविता | Poem on Tobacco in Hindi

Hindi Poetry on Tobacco Products:- भारत में लाखो लोगो की मौत प्रतेक वर्ष केवल तम्बाखू के सेवन से हो जाती हैं, Tobaccco की बिक्री पूरे देश में काफी बड़े अस्तर पे की जाती है क्योंकि इसके सेवन करने वाले लोगो की संख्या '100 Crore' से भी ज्यादा है इसे लगभग हर उम्र के लोग इसका सेवन करते है। मौजूदा समय में छोटे बच्चे भी इसके सेवन के आदि हो गए जिसके कारण उनकी जिंदगी खतरे में जाती दिखाई पड़ती है, हम सभी को मिल कर Tobacco को जड़ से खत्म करने के तरफ अपने कदम बड़ाना होगा।

Tobacco Products Poems in Hindi language along with Poster Quotes Shayari Sms Photo


Tobacco Products Poems in Hindi | धूम्रपान पर कविताएं


मैँ मौत को पुकारता हूँ कर रहा पुकार।
बीड़ी खैनी खाई मैने मृत्यु इंतजार।
मेरे मुंह मेँ दर्द आज कितनी पीड़ा है।  
ऐसी गंदी आदत ने मुंह मौत मोडा है। 

गुटखा खाया बीड़ी भी कुछ देर की मस्ती।
आज मेरी दुनिया से ही उठ रही हस्ती। 
न चाहा हमने फिर भी मौत सामने खड़ी।
पत्नी तो बेहाल है बेहोश ही पड़ी।

मेरे तो दो लड़कियाँ ना कोई बेटा है।। 
जीवन अपना चुक गया बेमौत लेटा हैँ।
बड़ी बेटी सोलह की छोटी को पढ़ाना।।   
घर अपना टूटा हुआ है उसको बनाना।

मेरे बच्चे सामने अनाथ हो रहे ।          
रो रहे है हमसे ही सवाल कर रहे। 
डॉक्टर कहता है यही गुटखे का है असर ।
जीव गल चुकी है मेरी हो गया कैंसर। 

चंद पल का मेहमान हूँ बस यही खबर है।
कुछ भी कर लो आज सब बे असर ही है।
हाँ मैँ ही समझा मैं था कितना स्वार्थी।  
लत लगा जो गुटके की निकलती अर्थी।

गुटका खाकर मैने क्या कमाल कर दिया।
परिवार को जीते जी कंगाल कर दिया।
अरे अब तो बोलती ही बंद हो गई. ।
वक्त आया मौत का डॉली सजी गई। 

आज मैं मौत से भयभीत हो रहा ।  
जाते जाते विनती आज एक कर रहा।
आपको ही आपका शीशा दिखा रहा।  
 आपका भविष्य क्या यही बता रहा।   

खाओ मत यह गुटका मत बीड़ी को पीना।
बन जाता यही रास्ता मौत का जीना।  
नशा जीती मौत कभी इसको न खाना।
मौत का यह फन्दा है मत इसको अपनाना।

समझो मेरे भाई मेरे दोस्त और हमदम।
यह सब लते बनी है मौत का कदम।  
सुनो मेरी बात अपना जीवन बचा लो।
ये अमानत तेरे घर की इस को बचा लो।
कवि: विपुल लखनवी



Poem on World No Tobacco Day in Hindi


आम दुकानों पे बिकता मरने का सामान...
सिगरेट, बीड़ी, तम्बाकू, खैनी गुटखे तमाम...

नही कोई प्रतिबंध, ना कोई रोक टोक सरकार की...
खुल्लम खुल्ला बिक्री चलती मौत के औजार की...

मोटे मोटे टैक्स आते हैं, सरकारी खजाने मे..
तभी देता नहीं कोई ध्यान, इसको रुकवाने में...

कहती है सरकार भी केवल धूम्रपान निषेध है...
ऊपरी मन का नाटक है ये, इनकम इससे विशेष है...

छोटे छोटे बच्चे भी, अपने बचपनें को जला रहे हैं...
अपने ही हाथों अपने फेफड़ों पे बंदूकें चला रहे हैं..

बड़े बड़े दफ्तरों के भी, मालिक अकल बंद हैं..
काम की स्ट्रेस हटाने को स्मोकिंग जोन का प्रबंध है..

कुछ खुल्लम खुल्ला पीते हैं, 
कुछ छुपके धुआं उड़ाते हैं...
कुछ ओकेजन के नाम पर भर भर डिब्बी पी जाते हैं...

बड़े बड़े शहरों में इसको, 
शान समझा जाता है...
पता नही इसका नुकसान क्यों इनको दिख नही पाता है..

असत्मा, टीबी, कैंसर, तम्बाकू की देन...
अपने और परिवार की खातिर, कर दो इसको बेन...

छोड़ दो बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, बन जाओ निरोग...
स्वस्थ और समृद्ध भारत मिलकर बनाओ सब लोग...

आओ मिलकर प्रण करें, तम्बाकू नही छूएंगे...
अपने और अपनों की खातिर बिन तम्बाकू जियेंगे..
अपने और अपनों की खातिर बिन तम्बाकू जियेंगे..
- अभिषेक गर्ग

Hindi Kavita On Tambaku ~ तंबाकू पर हिंदी में कविता 


यह जो तंबाकू रगड़ते हो अपने हाथों से
और फिर बड़ी ही तहजीब से दबाते हो दांतों के नीचे
फिर धीरे-धीरे नशे का आनंद लेते हो
जानते हो ना, तंबाकू और अपने रिश्ते के बारे में
अजी!! वह भी खूब वफादार है
वफा बेखूबी निभाएगा ऐसे ही
धीमे धीमे जकड़े का तुमको
और तुम्हें फिर अपनी मोहब्बत में फना कर जाएगा
-डॉ. निताशा 

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