विश्व पर्यावरण दिवस कविता | Poem on World Environment Day 2021 in Hindi

World Environment Day 2021 Kavitayen:- मानव जीवन को बचाए रखने के लिए हम सभी प्राणियों को पर्यावरण संरक्षण करने पे अपना विषेश ध्यान देना की आवश्कता है, मौजूदा हालात में दुनिया के सभी देशो में पेड़-पौधों की कटाई बहोत ऊंचे स्तर पर की जा रही है जिसके कारण Environment Polution बहोत बड़ गया है। प्रकृति को बचाने के लिए United Nation ने सभी देशों को "5 जून" को "विश्व पर्यावरण दिवस" मानने का आदेश देते हुए इस परंपरा की शुरुआत 1972 मेंकी और लोगो को Nature के प्रति जागरूक करने पे भरपूर जोर दिया। इस आर्टिकल में प्रकृति पर कविता लिखी मिलेगी जिसे भारत के कवियों ने लिखा है।

World Environment Day Kavita Images Pictures Quotes Shayari Hindi

World Environment Day 2021 Poems in Hindi - विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस कविता 


देखो पेड़ कितने निराले- अलबेले हैं, 
कुछ छोटे, कुछ विशाल सजीलें हैं, 
देते हैं हमें अनुपम उपहार, 
जीवन से अपने सिखाते परोपकार.

मीठे फल और सुगंधित फूल, 
प्राणवायु से रखते वातावरण अनुकूल, 
औषधियों की इनमें भरमार, 
इनसे सीखो जीने का व्यवहार.

झुरमुठ पर इनके चिड़ियों के रैन बसेरे, 
छाया में इनके सुकून पाते जीव-जंतु बहुतेरे, 
बदरी को रिझा कर वृष्टि करवाते, 
मजबूत जड़ों से मृदा-क्षरण रोक पाते.

धरती माँ कर रही पुकार, 
अब और ना मेरा परिवेश उजाड़, 
बनो मेरे संरक्षण में भागीदार, 
सुख-समृधि को करो अंगीकार.

इससे पहले कि सब कुछ बिगड़ जाए, 
चलो मिलजुलकर कुछ पेड़ लगाएं, 
एक तुम लगाओ और एक हम लगाएं, 
पेड़ों से इस धरा को उपवन सा बनायें।


हरा भरा वातावरण पर कविता - विश्व पर्यावरण दिवस पर कविता


चलो धरा को हरा बनाते हैं 
साँस लेने की जगह बनाते हैं 
करते हैं फिर से मिट्टी में हाँथ गंदे 
बोते हैं फिर से पेड़ों के बच्चे 
पालते हैं पोसते हैं उनको जतन से 

बड़ा उनको करतें हैं देके खाद पानी 
कभी कभी सख्ती भी उनपे करेंगे 
ज़रूरत पड़ने पे काट छांट करेंगे 
बेतरतीब बढ़ने से रोकेंगे उनको 
जड़ों को रोज़ सींचेंगे उनकी
ताकि पक सकें उनपे उम्मीद के मीठे फल।

पर्यावरण पर छोटी कविता - Small Poems On Nature in Hindi


पर्यावरण की कोई चिंता नहीं 
फिर क्यों ढोंग करते है हम..? 
'वृक्ष' एक लगाया नही बस, 
बाते बड़ी-बड़ी करते है हम।

साल में एक दिन बस पर्यावरण 
की चिंता करते है हम ।
'युवराज' उसी पर्यावरण को फिर
साल भर दूषित करते है हम।
~युवराज हरितवाल

World Environment Day Pollution - दूषित पर्यावरण पर कविता इन हिन्दी


विकास व शहरीकरण के कारण
बढ़ता ही जा रहा है प्रदूषण
दूषित होता जा रहा है दिनोदिन 
हमारा ये सारा पर्यावरण

खुली हवा में सॉंस लेना
अब हुआ बहुत ही मुश्किल है
विकट हुई है ये समस्या अब तो
कौन जाने इसका क्या हल है

इमारतों और सड़कों ने सारे
जंगल के पेड़ पौधे निगल लिये
फैक्ट्री कारखाने बनाकर हम समझे
हम सबसे आगे निकल गये..

कार व ए.सी से निकलता धुआँ
विषाक्त कर रहा है वायू को
शुद्ध हवा का अभाव कर रहा
अब कम हम सबकी आयू को..

चिंतन कर के हल ढूँढें नही तो
मनुष्य जीत कर भी जायेगा हार
समस्या को हम स्वयं दावत दे रहे
मानो कह रहे ‘आ बैल मुझे मार’
-लीना

Best Poetry on 2021 World Environment Day in Hindi Language With Images


धरती माँ की रक्षा के हित तुम्हें बुलाते हैं 
आ जाओ मेरे भारतवासी कसम दिलाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं 

वृक्ष धरा के अमर सिपाही बन कर आते हैं 
जीवन को संरक्षित करके हमें बचाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं 

प्रदूषित हवा का शोषण करके शुद्ध बनाते हैं 
शुद्ध हवा को हमको देकर प्राण बचाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं 

वृक्ष धरा के ईस्वर बनकर बादल लाते हैं 
मानसून की महिमा बनकर जल बरसाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं ।

हरा-भरा धरती को करके फूल खिलाते हैं 
भाँति - भाँति के खुशबू से ये जग महकाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं ।

पक्षियों के ये आश्रय बनकर उन्हे जिलाते हैं 
जंगलों में जानवरों का ये आवास बनाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं ।

जल और जीवन देकर ये दाता बन जाते हैं 
बहु आयामी होकर सबसे पूज्य कहाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं ।

प्रेमी युवा के सपनों में ये पुष्प खिलाते हैं 
बसन्त ऋतु की सुन्दरता दे प्रेम जगाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं ।

जड़ी-बूटियां अद्भुत ये उपलब्ध कराते हैं 
रोगों से मुक्ति देकर हमें स्वस्थ बनाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं ।

लेखन सामग्री हमको उपलब्ध कराते हैं 
भवन सामग्री देकर ये आवास बनाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं ।

अनेक प्रकार के व्यंजन ये हमें दिलाते हैं
रंग - बिरंगे कपड़े देकर सभ्य बनाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं ।

जीवन भर ये हम सबको आनन्द दिलाते हैं
मन ~ मयूर को नृत्य कराके प्रेम दिलाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं ।

इतने गुणों से भरे हैं फिर भी खौफ ये खाते हैं 
क्योंकि हम इन्सानो से ही नष्ट हो जाते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं 
तुम्हें सुनाते हैं ।

आओ हमसब मिलकर के कसम ये खाते हैं 
धरती को वृक्षों से भर श्रृंगार कराते हैं 
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं
तुम्हें सुनाते हैं ।

वनसम्पदा परम हितकारी शास्त्र बताते हैं 
जीवन का हर तोहफा देकर हमें हरषाते हैं
पर्यावरण व वन की महिमा तुम्हें सुनाते हैं
तुम्हें सुनाते हैं।
-प्रमोद पाण्डेय

अन्य कविताएं

में अपने पूरे टीम की और से आपको विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देता हु और उम्मीद करता की आप अपने सह परिवार के साथ परायावरण की रक्षा करेंगे और अपनी जमीनों पर पेड़ पौधों को लगाएंगे।