सुमित्रानंदन पंत की कविता चींटी | Sumitranandan Pant Poem Chiti

Poem On Ant In Hindi:- भारत में जिस प्रकार मनुष्य की जनसंख्या दूसरे स्थान पर है उसी प्रकार इस देश में कई सारे कीड़े भी पाए जाते हैं जो अन्य देशों के मुकाबले इस देश में बहुत ज्यादा है। कीड़ों की प्रजाति में से एक कीड़ा जो हमारे देश के कई राज्यो में पाया जाता है जिसे हम चींटी के नाम से जानते है ये वही चींटी है जो हमारे घर में मीठे खाद्य पदार्थों में लग जाता है जैसे चीनी मिठाई ,फल, इत्यादि। चींटी को समाजिक प्राणी कहा जाता है क्योंकि यह एक समूह में रहते हैं जैसे कि हम इंसान एक समूह में रहते हैं. 
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Sumitranndan Pant Short Poem Ant Chiti In Hindi- सुमित्रानंदन पंत की कविता चींटी

चींटी को देखा?
वह सरल, विरल, काली रेखा,
तम के तागे सी जो हिल-डुल,
चलती लघु पद पल-पल मिल-जुल,
यह है पिपीलिका पाँति! 

देखो ना, किस भाँति,
काम करती वह सतत, 
कन-कन कनके चुनती अविरत।

गाय चराती, धूप खिलाती,
बच्चों की निगरानी करती,
लड़ती, अरि से तनिक न डरती,
दल के दल सेना संवारती,
घर-आँगन, जनपथ बुहारती।

चींटी है प्राणी सामाजिक,
वह श्रमजीवी, वह सुनागरिक।
देखा चींटी को?
उसके जी को?
भूरे बालों की सी कतरन,
छुपा नहीं उसका छोटापन,
वह समस्त पृथ्वी पर निर्भर,
विचरण करती, श्रम में तन्मय,
वह जीवन की तिनगी अक्षय।

वह भी क्या देही है, तिल-सी?
प्राणों की रिलमिल झिलमिल-सी।
दिनभर में वह मीलों चलती,
अथक कार्य से कभी न टलती।

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इन्हीं बातों से प्रभावित होकर भारत के महान कविता रचयिता सुमित्रानंदन पंत जी ने एक कविता लिखी जिसका नाम इन्होंने चींटी रखा इस कविता में उन्होंने कई चीजें बताइए जो हमें पढ़ना चाहिए कवि सुमित्रानंदन जी की कविता चींटी जिसे आपने बहुत प्रेम दिया इस कविता को आप अपने मित्रों के साथ भी शेयर करें ताकि उन्हें भी जानवर दो कीड़े मकोड़ों के प्रति भी अपना ध्यान देना चाहिए क्योंकि यह भी प्राणी है हमारी तरह फर्क बस इतना है यह हमारी तरह रह नहीं सकते धन्यवाद।