सुमित्रानंदन पंत की कविता भारत माता | Bharat Mata Poem Sumitranandan Pant

Bharat Mata Poem Hindi:- हम सभी भारतीय नागरिक अपने महान अति सुन्दर देश को "भारतमाता" के नाम से संबोधित करते है क्योंकि इस देश में हम पैदा हुए और इसी धरती ने हमे रहने के लिए जमीन दिया, खाने के लिय अनाज पीने के सुद्ध जल भी इसी मिट्टी के नीचे से मिला है। हम सभी भारतवाशी अपने देश से बहोत प्यार करते है सायद यही कारण हैं को भारत के महान काव्य रचनाकार स्वगवाशी श्री सुमित्रानंदन पंत जी ने भारत माता कविता लिखी और देश को समर्पित किया था। 


Bharat Mata Poem of Sumitranandan Pant in Hindi


भारत माता ग्रामवासिनी।
खेतों में फैला है श्यामल
धूल भरा मैला सा आँचल,
गंगा यमुना में आँसू जल,
मिट्टी कि प्रतिमा 
उदासिनी।

दैन्य जड़ित अपलक नत चितवन,
अधरों में चिर नीरव रोदन,
युग युग के तम से विषण्ण मन,
वह अपने घर में 
प्रवासिनी।

तीस कोटि संतान नग्न तन,
अर्ध क्षुधित, शोषित, निरस्त्र जन,
मूढ़, असभ्य, अशिक्षित, निर्धन,
नत मस्तक 
तरु तल निवासिनी!

स्वर्ण शस्य पर -पदतल लुंठित,
धरती सा सहिष्णु मन कुंठित,
क्रन्दन कंपित अधर मौन स्मित,
राहु ग्रसित
शरदेन्दु हासिनी।

चिन्तित भृकुटि क्षितिज तिमिरांकित,
नमित नयन नभ वाष्पाच्छादित,
आनन श्री छाया-शशि उपमित,
ज्ञान मूढ़ 
गीता प्रकाशिनी!

सफल आज उसका तप संयम,
पिला अहिंसा स्तन्य सुधोपम,
हरती जन मन भय, भव तम भ्रम,
जग जननी 
जीवन विकासिनी।

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सुमित्रानंदन पन्त जी ने अपने जीवन में कई काव्य रचनाएं प्रकाशित की जिन्हे आज भी कई लाखो लोग पढ़ते है। उम्मीद करूंगा कि आप को पंत जी के द्वारा लिखी गई कविता भारतमाता पसंद आई होगी इस कविता में पंत जी देश की संस्कृति को दरसाया है, आप से निवेदन है कि आप अपने मित्रो को भी शेयर करे वो भी इस कविता से कुछ सीख सके।