बुद्ध पूर्णिमा पर कविता | Poem on Budhha Purnima in Hindi

Buddha Purnima Poems 2021 :- मेरे प्यारे कविता प्रेमी भाईयो बहनों, भगवान बुद्ध का इस महान देश में जन्म लेना हमारे लिए एक गर्व की बात है क्योंकि बुद्ध का संपूर्ण जीवन मानव कल्याण में ही बिता था। Bhagvan Budhha की बताई गई सारी बाते जिसे अंग्रेजी में Quotes कहते है वो सभी बाते आज मनुष्य अपने वर्तमान जीवन में उपयोग करते हुए बोध्य धर्म की दिक्षा लेके अपना जीवन खुशी रहा है। Gautam Budh जी का जन्म 563 ईसा पूर्व में हुआ था इन्होंने अपनी बुद्धि का विकाश किया जिसके कारण बुध जी की पूर्णिमा मौजूदा सभी देशों में मनाया जाता हैं।

भगवान बुद्ध पूर्णिमा कविता कोश Budha Purnima Poems in Hindi language poster

गौतम बुद्ध पूर्णिमा कविता - Buddha Purnima Poems in Hindi


वृत्तियों से छूट कर हम शुद्ध हो जायें।
वश हमारे जब सभी अनिरुद्ध हो जायें।
बन्धनों से छोड़कर ही यशोधरा राहुल,
त्याग की प्रतिमूर्ति वाले बुद्ध हो जायें।

बुद्ध भगवान की कविता - Gautma Buddha Purnima Kavita in Hindi


बुंद बुंद से घट भरे, ज्ञान भी बुंद समान।
ज्यों ज्यों मस्तिष्क में भरे, बनें मानव महान।।
जौं कछुं नाहिं तुम्हारे, उसपर काहे की मोह।
मोह तजे सुख पइहैं, मन न धरिए लोभ।।

क्रोध गरम अंगार है, इसे पकड़ जो राखिए।
दूजों को भस्म नाहिं करै,आपहिं इसमें जालिहैं।।
बढ़ चढ़ कर जे बोलिए, करे जो ईष्या द्वेष।
मन में शांति न मिले, घर में आए क्लेश।।

तीन चीज कबहूं न छूपे,सुर्य चंद्रमा सत्य।
झूठ का बादल छट जाए प्रकट होय जब सत्य।।
नाहिं सुख में उन्माद हो, नाहिं दुःख में अधीर।
जो दुःख में भी डटे रहे, वो हैं परम धर्म वीर।।
                             सोनिया शर्मा

बुद्ध पूर्णिमा पर शायरी - Budhha Purnima Shayari Hindi



संसार के ख़ातिर जो त्यागें ख़ुद की इच्छा,बुद्ध वहीं हैं
त्यागकर महलों की सुविधा मांगें भिक्षा,बुध्द वहीं हैं
मानव के कल्याण की ख़ातिर ले ले दीक्षा,बुध्द वहीं हैं
प्रयास से जिसके जगत की दूर हो तृष्णा,बुद्ध वहीं हैं

देखकर संसार की दुर्गति,ख़ुद को खपा दे,बुद्ध वहीं हैं
दिलाना चाहें सबकों मुक्ति,ख़ुद को छोड़ के,बुध्द वहीं हैं
सह ले सबका क्रोध हिंसा,बस मुस्कुरा के,बुद्ध वहीं हैं
फ़िर ला दे उसको सत्य राह पर,अपने वचन से,बुद्ध वहीं हैं

सम्यक दृष्टि समभाव संतुलन बनकर रहें जो,बुद्ध वहीं हैं
देख कर विपदा विषाद से विचलन ना हो,बुद्ध वहीं हैं
अन्वेषक सा बनकर चाहे समाधान संसार का जो 
सरल भाव और शुद्ध हृदय से अपना बना ले,बुद्ध वहीं हैं ।।
-बिमल तिवारी


 बौद्ध धर्म पर कविता - Budhha Dharm Poetry Hindi

धर्म को धारण करो
धर्म को धार मत दो
धर्म से रक्षा करो तुम
उसे हथियार मत दो
हिंसा को हर धर्म ने 
अधर्म ही कहा है
धर्म को चिंगारियों से
जलते विचार मत दो
धर्म से चेतना के
द्वीप प्रज्ज्वलित करो
धर्म को नफ़रत भरा
कोई व्यवहार मत दो
-डॉ राजीव पाण्डेय


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भगवान गौतम बुद्ध पूर्णिमा की आप सभी को दिल के गहराइयों से बधाई उम्मीद करूंगा की आप इस कविता को अपने दोस्तो को शेयर करे।