कोयल पर कविता | Koyal Bird Poem in Hindi

भारत देश के अलावा ऐसे बहोत सारे देश है जहा पछिया पाई जाती है उनमे से एक पंक्षी जिसे हिंदी में कोयल या कोकिल कहके सम्बोधित किया जाता है जो "कुक्कू कुल" का पक्षी होता है। इस Bird को हमारे धरती के वैज्ञानिक 'युडाइनेमिस स्कोलोपेक्स' नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता है। कोयल पक्षी को चिड़ियों की रानी कहा जाता क्योकि ये हर पक्षी से सुंदर लगती और कोकिल की आवाज बहोत प्यारी होती है। ये बसंत के मौसम में कुहू कुहू कर जब गाना गाती तो मनुष्य अपना पूरा ध्यान इन पे ही रखता है।


Cuckoo पक्षी से  हमे सिख मिलती है कि हमे अपने बोली को मधुर वाणी में उपयोग करना चाहिए परतुं आज भी इस पृथ्वी पे के लोग कठोर वाणी का उपयोग किया करते है। Koyal सर्वाहारी होती जो अलग अलग प्रकार के कीड़े, छोटे अंडे, कशेरुक, या फिर फल खाती है।



Koyal Rani Poem in Hindi | Cuckoo Poem in Hindi


कहाँ अब कोयल कोई गीत सुनाती है
उसकी मधुर आवाज बहुत रुलाती है 
हाय हाय हे मानव ये क्या किया तूने 
बनाने अपना घर जंगल काट दिया तूने 

श्राप लगेगा तुझे मेरा ऐ मतलबी इंसान 
ऱह ना पायेगा चैन से देखना हे भगवान 
अपने बच्चों के लिये काटे तूने पेड़ सारे
सोचा एक पल भी जायेंगे हम बेमौत मारे 

तड़प तड़प कर भूख प्यास से हम है बेहाल
कैसे रहेंगे बच्चे तेरे स्वस्थ्य और खुशहाल 
था जमाना जब पेड़ों से लदी थी ये धरती
बर्फ ढ़के पहाड़ नदियाँ कल कल करती 

संजीवनी थी प्राण वायु जल निर्मल शीतल
लहलाहती फ़सले और कुएँ भरे रहते जल 
आया फ़िर हत्यारे मानव का मोह मायाजाल 
मचाया लुट हत्या युद्ध का तांडव महाकाल 

चीख उठी धरती सारी हुआ इतना विनाश 
फ़िर भी मिटा नहीं मानव अहंकार मोहपाश 
सदियों की तड़पन मै याद तुम्हें दिलाती हूँ
बेवजह कहाँ तुम्हें करुण व्यथा सुनाती हूँ 

आज अगर तुम ना जागे तो बहुत पछताओगे
ना हवा ले पाओगे ना ही पानी पी पाओगे 
बचे ही नहीं वो जंगल जिनमें जीवन हो
मेरे बच्चों के लिये कोई महकता उपवन हो 

बस इतना कर हे मानव की अब कुछ ना कर
कर रहम धरती माँ को अपने हाल पर छोड़कर 

Koyal Ki Boli Poem In Hindi



Koyal Poem in Hindi by Subhadra Kumari Chauhan


कोयल हिंदी कविता -सुभद्रा कुमारी चौहान 

देखो कोयल काली है पर, 
मीठी है इसकी बोली,
इसने ही तो कूक कूक कर,
आमों में मिश्री घोली।

कोयल कोयल सच बतलाना,
क्या संदेसा लायी हो?
बहुत दिनों के बाद आज फिर,
इस डाली पर आई हो।

क्या गाती हो किसे बुलाती?
बतला दो कोयल रानी,
प्यासी धरती देख मांगती,
हो क्या मेघों से पानी?

कोयल यह मिठास क्या तुमने,
अपनी माँ से पायी है?
माँ ने ही क्या तुमको मीठी,
बोली यह सिखलायी है?

डाल डाल पर उड़ना गाना,
जिसने तुम्हें सिखाया है,
सबसे मीठे मीठे बोलो,
यह भी तुम्हें बताया है।

बहुत भली हो तुमने माँ की,
बात सदा ही है मानी,
इसीलिये तो तुम कहलाती,
हो सब चिड़ियों की रानी।





Short Poem on Koyal in Hindi | Koyal Didi Mujhe Batao Poem

देखो कोयल काली काली
सावन में होकर मतवाली
कुदक फुदक कर तरूओं पर
झूल रही है डाली डाली
आई बहार बागों मे जब से
हुआ सुहाना मौसम तब से
मधुर कंठ से कोयल अपने
मिश्री जैसे स्वर में गाती
सबका मन वश में कर लेती
           -सुधा बसोर