आज की हमारी कविता "मकर संक्रांति पर कविता"  के उपर होनी वाली है मकर संक्रांति जो कि हमारे देश का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जिसे पूरा भारत वर्ष बड़े ही धूमधाम से मनाता  है इस त्यौहार को भारत के अलावा अन्य देशों में भी मनाया जाता है जैसे श्रीलंका, म्यांमार नेपाल आदि जब पौष मास में सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है ।  




आज की शताब्दी मे यह त्यौहार साल के जनवरी माह में 14वें दिन मनाया जाता है मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है जिसे लोग इस दिन को शुभ मानते हैं और इस दिन मकर संक्रांति मनाते हैं।

इसे हम  "पोंगल" नाम से भी जानते हैं हालांकि तमिलनाडु में इसे पोंगल नाम से जाना जाता है लेकिन कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश में इसे संक्रांति नाम से मनाते हैं और कहीं कहीं पर तो इसे अंतरायड़ी भी कहते हैं मकर संक्रांति भारत और नेपाल में अलग-अलग नामों तथा अलग-अलग रीति-रिवाजों से धूमधाम से मनाया जाते हैं। हालांकि इसे भारत में विभिन्न विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे:-

  • खिचड़ी- उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार 
  • सीसूर  सेक्रांत -कश्मीर घाटी 
  • भोगाली बिहू- असम
  • माघी- हरियाणा, हिमाचल प्रदेश ,पंजाब
  • उत्तरायण - गुजरात, उत्तराखंड
  • लोहड़ी- पंजाब
  • मकर संक्रमण- कर्नाटक


मकर संक्रांति पर कविता। Poem On Makar Sankranti In Hindi


  •  नेपाल में मकर संक्रांति कैसे मनाई जाती है?

नेपाल में मकर संक्रांति के दिन सभी किसान एकजुट होते हैं और भगवान को धन्यवाद देते हैं उनकी अच्छी फसल के लिए और सभी लोग ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह अपनी दया दृष्टि इसी प्रकार हमेशा उन पर बनाए रखें और यही कारण है कि नेपाल में इसे यानी मकर संक्रांति को फसल और किसानों का त्यौहार भी कहा जाता है।

इस दिन किसानों के चेहरे पर यह एक अलग ही लालिमा झलकती रहती है जो कि मकर संक्रांति पर अपनी खुशियां बांटते बिखरते नजर आते हैं और तो और मकर संक्रांति के दिन वहां की आनी है नेपाल की सरकार सभी लोगों को सर्वजनिक छुट्टी प्रदान करता है और तो और थारू समुदाय कहां बिजी है एक प्रमुख त्योहार माना जाता है जिसे नेपाल के बाकी समुदाय भी तीर्थ स्थल पर स्नान करके मनाते हैं।

सुबह सुबह नहाने के बाद यह दान पूर्ण करते हैं और तिल के बने लड्डू घी की बनी सामग्री शर्करा और कंदमूल को पाकर यह धूमधाम से मकर संक्रांति को मनाते हैं जहां तक की मेरा मानना है मकर संक्रांति 1 महत्वपूर्ण त्योहार है जिसे पूरा भारतवर्ष बनाता है।

  • पंजाब में लोहड़ी कैसे मनाई जाती है?

हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी नाम से भी जाना जाता है परंतु लोहाडी मकर संक्रांति के 1 दिन पहले यानी 13 जनवरी को ही मनाया जाता है और इस दिन अंधेरा होते ही लोग आग जलाने लगते हैं आग जलाकर अग्नि देव की पूजा अर्चना करते हैं। पूजा करते हुए तिल के गुण चावल और भुने हुए मक्के  देव को  आहुति दी जाती है इस अवसर पर वहां की बहू बेटियां घर घर जाकर लोहारी गीत गाती है और वहां के नौजवान और बच्चे बड़े ही धूमधाम से लोहड़ी का आनंद उठाते हैं।

  • बिहार में मकर संक्रांति कैसे मनाई जाती है?


बिहार में मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है इस दिन तिल गुड़ बादाम पट्टी और दानों से बने लोगों को दान किए जाते हैं उनका मानना है कि दान करने से हमें सुख प्राप्त होती है जोकि खिचड़ी यानी मकर संक्रांति पर हमेशा करना चाहिए जिससे हमारी आत्मा को प्रशंसा प्राप्त होती है सभी महिलाएं अपने पहले मकर संक्रांति पर नमक ऊनी कपड़े कपास आपस में दान करते हैं

असम में मकर संक्रांति यानी खिचड़ी को माघ बिहू अथवा भोगली बिहू के नाम से पर्व को मनाते हैं जोकि उनके लिए है एक सुंदर एवं प्रेम पूर्वक भरा त्योहार माना जाता है

राजस्थान के इस  पर्व पर यानी मकर संक्रांति के त्यौहार पर विवाहित औरतें अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं और तो और 14 ब्राह्मणों को दान भी देती है 

हालांकि मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाया जाता है परंतु कुछ पंडितों का कहना है कि इस बार  2021 मेंं मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाना उचित होगा अभी आपके ऊपर है कि आप 14 जनवरी मनाते है या 15 जनवरी को ऐसे मकर संक्रांति तो ज्योतिष के हिसाब से 15 जनवरी को मनाना चाहिए।

महान हुआ के अनुसार सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी शाम को प्रवेश करेगा विद्वानों का कहना है कि शाम को मकर संक्रांति नहीं बनानी चाहिए जिसका अर्थ है कि अगले दिन यानी 15 जनवरी को प्रातः ही सूर्योदय होते समय ही हम मकर संक्रांति बना सकते हैं तो जिससे यह पता लगता है कि हमें मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाना चाहिए