नारी शक्ति पर कविता। Poem On Nari Shakti In Hindi


 
मनाव जीवन जो आज हम सभी लोग जी रहे है वो केवल महिलाओ या नारी  के कारण ही संभव हो पाया है। नारी ही है जो अपने बच्चे को नव महीने तक अपने पेट में रख कर उसे जन्म देती है। दुनिया आज जिसे हम बोलते है वो महिलाओ (नारी) के शक्ति के करन ही हुआ है। आज वहीं नारिया हमारे आपके घर पर है जिन्हें हम माँ, बहन, बुआ, दादी, मौसी, भाभी, मामी, पतोह,बहु,सास, चाची,बेटी कहते है। 

हम्म सभी को Nari Shakti को नमन करना चाहिए और महिलाओंं को सम्मान देना चाहिए जाहे कोई भी हो अगर नारी हमें बस, ट्रेन, गाड़ी, ऑटो, या फिर स्कूल,  गावं , शहर कहीं भी दिखें तो हमें सम्मान के साथ देखना चाहिए। आज की जो भी कविता यानि पोएम आप को पढ़ने को मिलेगा वो सारे Poem Nari Shakti पर है। साथ ही में आप को बताना चाहता हु की महिला दिवस 8 मार्च को पूरी दुनिया में मनाया जाता है।

नारी शक्ति पर कविता इन हिंदी। Poem On Nari Shakti In Hindi


नारी शक्ति पर कविता इन हिंदी। Poem On Nari Shakti In Hindi


शीर्षक  -  वो इक नारी है 
वो घर से निकलती है
नया इक माकाम बनाती है
वो घर आ कर अपनी भूमिका भी
खूब निभाती है
वो इक नारी है , वो इक नारी है ।

माँ बनकर ममता की बौछार लगाती है
पत्नी बनकर सुख - दुःख में साथ निभाती है
बहन बनकर कितना स्नेह लुटाती है
हर रूप में लगती प्यारी है
वो इक नारी है , वो इक नारी है ।

कहने को तो वो है बहुत महान
नारी है नर की खान
फिर भी मिलता नहीं उसको
उसका उचित स्थान
आओ हम सब मिलकर 
नारी का सम्मान करें
"उस पर गर्व करें आभिमान करें
उस पर गर्व करें आभिमान करें "

- रश्मि शुक्ल रीवा (म.प्र)

नरी पर कविता Nari Shakti Kavita


शीर्षक  - नारी : अबला नहीं सबला

कोमल है  कमजोर नहीं 
अब साबित कर दिखाना है
आजादी की नींव खोदकर
प्रगति का  पत्थर लगाना है

दया और माया की मूरत
जब बनती महतारी है
रौद्र रूप कर लेती धारण
गर सामने अत्याचारी है

अपने साहस के दम पर 
अब नवल इतिहास बनाना है
बेङियों को तोङकर 
बस आगे कदम बढ़ाना है।
- दीपाली गुप्ता

Nari shakti Poem नारी शक्ति पर पोएम


क्षीण नहीं,अबला नहीं,
ना ही वह बेचारी है,
जोश भरा लिबास पहने,
गर्व से चलती,आज की नारी है।

त्याग की सूरत,ममता की मूरत,
तो कभी देवी का प्रतिरूप कही,
जैसी जिसने मांग करी,
वह ढलती उसके स्वरूप रही।

आजादी के सफर में,अब
तंग गलियों का रुख मोड़ रही है,
प्रतिबंध की दीवारों को,
हौसलों के हथौड़े से वह तोड़ रही है।

लड़की हो,तुमसे नहीं होगा,
यह बातें अब सारी धुआं है,
ऐसा कोई क्षेत्र बता दो, जिसमें,
नारी ने बुलंदियों को नहीं छुआ है।

योद्धा बनी वह हर परिस्थिति में,
उसके होने से जीवन में जान है,
झंकार है उसकी पायल से,
नहीं तो आंगन सूना और वीरान है।।

- कीर्ति 

Best Poem On Nari Shakti In Hindi


साथ तुम्हारे ही रह कर,
तुमको कमजोर बनाऊंगी,
अपनी आजादी ‌की राह की,
कि हर कांटे को सह जाऊंगी!!

नारी हुं कमजोर नहींं,
अब अपमान ना सह पाऊंगी,
मेरे अंदर है आग भरी,
बन भानु ज्योत फैलाऊंगी!!!

अन्याय सहन नहीं अब करना,
अपनी हर कर्तव्य निभाऊंगी,
किंतु शोषित नहीं रह पाऊंगी,
अपने लक्ष्य को करने हासिल,
हर चुनौती पार कर जाऊंगी !!

तेरी मुट्ठी में कैद ना समझ मुझे,
तुझको खोखला कर जाऊंगी,
अपनी बुद्धि की छेनी से,
सौ टुकड़े तुझको कर जाऊंगी !!!

मिले प्यार सम्मान अधिकार मुझे,
खुद को सुपुर्द कर जाऊंगी,
अन्याय सहन नहीं अब करना,
बन काली अन्याय मिटाऊंगी !!
 
 -  मनीषा झा ( गुजरात)

Nari Sashaktikaran Par Kavita नारी सशक्तिकरण
 पर कविता


नारी सब पर भारी

पुरुष प्रधान समाज रहा
रूढ़ियों के अनुरूप
परिवर्तन नियम जीवन का
बदल रहा हर रूप।

जो सदियों से सहती आई
लोक शर्म और लाज
साहस आज बांधकर थामे
हाथों में औजार।

आज उड़ान भरी है देखो
सपने हों साकार
धीरे-धीरे रूप को अपने
दे रही वो आकार।

नारी रूप निखर जब आए
पौरुष भी घबराए
सक्षम कुशल व्यक्तित्व उसका
देख पसीना आए।

नारी बेचारी कह कहकर
शोषित बहुत कर डाला
खुद को सशक्त कर उसने
नारी सशक्तिकरण कर डाला।

अपनी काया को काट छांट
सब बंधन उसे हटाने हैं
अपनी पहचान बना
समाज को अद्भुत रूप दिखाने हैं।

- सरोज रावत बागेश्वर (उत्तराखंड)


आए दिन नारी शोषण होता ही रहता है नारी वो के ऊपर बहुत अत्याचार होता है। हमें महिलो पे होने वाले अत्याचार को कम करने में मदत करनी होगी और Nari Shakti के ऊपर अपना समय देना होगा नारी सशक्तिकरण करना ही होगा आप से उम्मीद है आप महिलाओंं को सम्मान देंगे।