भारत एक ऐसा देश जो पूरी दुनिया में अपना साम्राज्य कायम कर चुका है। आप दुनिया के किसी भी देश में हो वहाँ आपको भारत के लोग आप के आस पास मिलेंगे। भारत के संविधान के कारण ऐसा हो सका क्योंकि जब 26 नम्बर 1949 को संविधान पारित हुआ तो उसमें ऐसे नियम रखे गए जिसके कारण आज पूरी दुनिया में भारत के लोग मिल जाते है। भारत के संविधान पर कविता जो आपको बहोत अच्छा लगेगा। 

भारत के संविधान पर कविता


राष्ट्रवाद में संविधान हमारा 
सर्वप्रमुख रहा सर्वजगत में
लोकतंत्र का मान बना यह
भारतीय जनतंत्र का हमारा नारा है

सार्वजनिक मताधिकार देकर
निर्धन और नारी को मान दिया 
जब विकसित देशों ने विधि में
निसंकोच उन्हें अपने छोड़ा है

कहते हैं अपने विधान में
सभी नागरिकों को मान देकर
लोकतंत्र का सबसे बड़ा खेल
अंबेडकर,नेहरू ने हिम्मत से खेला है

सबसे लंबा विधान बना यह
सब घटकों को स्थान मिला
अपूर्व ऐतिहासिक विधान यह
जिसको किसी घटक ने ना ललकारा है

संप्रभुता और धर्मनिरपेक्षता
दोनों का मिलान कराकर
मिश्रित जब हुआ भातृत्व का रंग
भारतीय विधान को अक्षुण्ण बनाया है
-निशि

मैं भारत का संविधान हूँ


26 नवंबर 1949 को पारित
26 जनवरी 1950 को लागू
सबसे बड़ा लिखित फरमान हूँ
देश का सर्वोच्च विधान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ

संप्रभुतासंपन्न समाजवादी
लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष
मैं ही गणतंत्र की पहचान हूँ
देश का सर्वोच्च विधान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ

470 अनुच्छेद 25 भाग व
12 अनुसूचियां है मुझमे
मैं 104 संशोधन की दास्ताँ हूँ
देश का सर्वोच्च विधान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ

शक्तियां केंद्र राज्य में बंटी
पूरी तरह संघीय मेरा ढांचा
मैं देश की आन बान शान हूँ
देश का सर्वोच्च विधान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ

समान हक मिले सबको
सबको अवसर मिले समान
मैं हर नागरिक की मुस्कान हूँ
देश का सर्वोच्च विधान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ

धर्म उपासना की आजादी
सामाजिक आर्थिक न्याय भी
मैं अभिव्यक्ति का अरमान हूँ 
देश का सर्वोच्च विधान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ

मूल अधिकार के साथ साथ
मुझ में अंकित कर्तव्य भी है
मैं हिंदुस्तान का बाग़बान हूँ
देश का सर्वोच्च विधान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ

ना ही अधिक लचीला हूँ मैं
ना ही बहुत कठोरता मुझ में
मैं मध्यमार्गी ठोस निशान हूँ
देश का सर्वोच्च विधान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ

जवान सा चौड़ा सीना है
किसान सा मजबूत होंसला
मैं हर गरीब का कल्याण हूँ
देश का सर्वोच्च विधान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ

अन्याय कभी ना होने दूंगा
कभी भी कोई पक्ष ना लूंगा
मैं ही भारतवर्ष का ईमान हूँ
देश का सर्वोच्च विधान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ

संविधान सभा का ऋणी
जिसने बनाया था मुझ को
मैं आज हर रोग का निदान हूँ
देश का सर्वोच्च विधान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ

मुझमे एक दिल धड़कता
एक दिमाग का मालिक मैं
हाँ मैं जीता जागता इंसान हूँ
देश का सर्वोच्च विधान हूँ
मैं भारत का संविधान हूँ

डॉ मुकेश अग्रवाल

भारत के संविधान पर लिखी गई कविताये आप को कैसे लगी है उमीद है आप को पसंद आई होगी । में आप को बता दू की 26 नंम्बर को हर साल संविधान दिवस के रूप में पूरी दुनिया में रहने वाले भारत के लोग मनाते है। मैं भारत का संविधान बोल रहा हु आप लोग जहां भी रहे खुश रहे और भारत के बारे में पूरी दुनिया को बताओ। जय हिंद जय भारत