आज की कविता बहोत ही सुंदर और दिल के गहराइयो से लिखी गयी है। आप सभी ने कभी ना कभी एक कलम का उपयोग किया होगा लिखने के लिए। आज हर इंसान कलम का उपयोग करता है ओर चाहे तो कोई भी हो। 



कलम पर कविता


कलम का काम है लिखना,
वो तो बस वही लिखेगी,
जो आपका दिमाग 
लिखवाना चाहेगा ,
सत्य-असत्य,अच्छा- बुरा 
अपना या फिर पराया I 

निर्जीव होते हुए भी ,
सजीवता का आभास 
कराती है सबको,
भावनायें,विवेक,विचार 
सब तो आपके आधीन है 
ये कहाँ कुछ समझ पाती है I 

बहुत सोच समझ कर 
उठाना ये कलम,
ये स्वयं का परिचय नहीं देती 
ये देती है परिचय आपके,
बुद्धि, विवेक और संस्कार का I 

स्वरचित ( मंजू कुशवाहा)