आज हर कोई अपने बच्चों को अच्छे School में पढ़ाई करवा रहा है ताकि वे अपने जीवन मे डॉक्टर या कोई भी नोकरी कर सकते। आज आप को इस लेख में कुछ Poem  दिए गए है जीने आप Students Class 3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 के विद्यार्थी अपने School में Comptition के लिए उपयोग कर सकते है।

Poem For Class 3 Third Students In Hindi

Poem For class 3 students in hindi


खेलकूद की आजादी

हमें चाहिए, अजी चाहिए-
खेल-कूद की आजादी!

बोर करो मत पापा जी अब
हमको टोको ना,
क्रिकेट खेलेंगे दिन भर अब
हमको रोको ना।
खेल नहीं तो जीवन भी है
फीका-कितना फीका,
बिना खेल के अजी जायका
बिगड़ा है अब जी का!

बहुत सहा है, नहीं सहेंगे
अब हम कोई बंधन,
खेल नहीं तो पढ़ने में भी
कहाँ लगेगा मन!

खेल-कूद से ही आती है
हिम्मत कुछ करने की,
मुझे बताया करती थी यह
हँस-हँस प्यारी दादी।
इसीलिए तो हमें चाहिए,
खेल-कूद की आजादी!

खेल नहीं बेकार, इसे अब
दुनिया मान रही है,

Poem For Class 3 & 4 Students In Hindi


पापा कैसी कार मंगाई?



पापा कैसी कार मंगाई।
आठ लाख में घर आ पाई।   

मुझको तो गाड़ी यह पापा, 
बहुत-बहुत छोटी लगती है। 
अपने घर के सब लोगों के, 
लायक नहीं मुझे दिखती है।

फिर भी जश्न मना जोरों से, 
घर-घर बांटी गई मिठाई। 

कार मंगाना ही थी पापा, 
तो थोड़ी-सी बड़ी मंगाते। 
तुम, मम्मी, हम दोनों बच्चे, 
दादा-दादी भी बैठ जाते।

सोच तुम्हारी क्या है पापा
मुझको नहीं समझ में आई। 

मां बैठेगी, तुम बैठोगे, 
मैं भैया संग बन जाऊंगी। 
पर दादाजी-दादीजी को, 
बोलो कहां बिठा पाऊंगी।

उनके बिना गए बाहर तो
क्या न होगी जगत हंसाई?

मम्मी-पापा उनके बच्चे, 
क्या ये ही परिवार कहाते
दादा-दादी, चाचा-चाची, 
क्यों उसमें अब नहीं समाते!

परिवारों की नई परिभाषा, 
मुझको तो लगती दुखदाई।। 

School Competition Poem For Class 3rd Students


 कुछ किस्से नए सुना लें

कुछ किस्से नए सुना लें,
कुछ मीठे गाने गा लें।

गुनगुना आज मौसम है
छोड़ो सब रोना-धोना,
कुछ गुब्बारे ले आएँ,
एक नन्हा रेल-खिलौना।
भैया, तुम रेल चलाना,
हम झंडी जरा हिला लें!

तुम बौने लेकर आना
हम सोने जैसी परियाँ,
फूलों की पोशाकें हों
बस, फूलों की ही छड़ियाँ।
सब मिल सपना बन जाए,
हम मिलकर उसे उछालें!

यह हवा कभी चुपके से
कहती है कथा-कहानी,
मन करता, बस्ता पटको
कर लो थोड़ी शैतानी।
तितली के पीछे दौड़ें-
हम खुशबू जरा उड़ा लें!

कुछ डाँट-डपट पापा की
मम्मी की बातें मीठी,
एक चूँ-चूँ करती चिड़िया
एक पीं-पीं करती सीटी।
इक गीत अजब-सा इनका
हम नए सुरों में ढालें!

Hindi Kavita For Class 3,4,5,6, Students 

एक मटर का दाना

एक मटर का दाना था जी
एक मटर का दाना,
गोल-गोल था, सुंदर-सुंदर
था वह बड़ा सयाना!

घर से निकला, चौराहे पर
मिली उसे एक कार,
उछला-कूदा, कूदा-उछला
झटपट हुआ सवार
बैठ कार में, खूब अकड़कर

दौड़ा - दौड़ा - दौड़ा,
गलियाँ, सड़कें, चौरस्ते
सबको ही पीछे छोड़ा।
आगे-आगे, दौड़ा आगे
एक मटर का दाना!
एक मटर का दाना, था जो-
सचमुच बड़ा सयाना!

दिल्ली देखी, जयपुर देखा
कलकत्ते हो आया,
सभी अजूबे देख-देखकर
झटपट घर पर आया।
आ करके, नन्हे चुनमुन को
किस्सा वही सुनाया,
खूब हँसा वह, औरों को भी
खिल-खिल खूब हँसाया।

देखो, एक घुमक्कड़ समझो
मुझको जाना-माना,
इब्न बतूता संग घूमा हूँ
किस्सा बड़ा पुराना!
अजी मटर का दाना था वह

Poem In Hindi For Class 3,4,5,6,7,8,9 Students

चूहा और ऐनक
घूम रहा था चूहा घर में
टेबल के ऊपर वह आया
वहां पड़ा था सुंदर ऐनक
जो था उसे बहुत ही भाया ...

ऐनक लेकर कान चढ़ाया
और सामने दर्पण पाया
देखा उसने एक बड़ा सा
चूहा उसके सम्मुख आया ...

आंख तरेरी उसने उस पर
वही रूप उस पर भी छाया
लपका उस पर जब यह चूहा
दर्पण से जाकर टकराया ...

बार-बार टकराए दोनों
कोई उनमें जीत न पाया
चूहा लगा बैठ सुस्ताने
वैसा ही दूजा सुस्ताया ...

शिथिल हुआ जब पहला चूहा
मुड़ा और बिल घुसने धाया
उसे देखकर दूजे ने भी
उसी दिशा में कदम बढ़ाया ...

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